ये ब्लॉगिंग है जनाब !... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा -
संध्या शर्मा का नमस्कार.....ये ब्लॉगिंग है जनाब ! जैसे हड्डी-शोरबा मिला शोख़ क़बाब या गज़क लाजवाब पर यहाँ नहीं है कोई नवाब एक-दूजे का जोरदार हुकुम बजाइये और नजराना में वही आह-वाह पाइय..
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ये ब्लॉगिंग है जनाब !... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा -
संध्या शर्मा का नमस्कार.....ये ब्लॉगिंग है जनाब ! जैसे हड्डी-शोरबा मिला शोख़ क़बाब या गज़क लाजवाब पर यहाँ नहीं है कोई नवाब एक-दूजे का जोरदार हुकुम बजाइये और नजराना में वही आह-वाह पाइये......लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........ श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ? - श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ? आ रही सट्टालय से पुकार है बुकी गरजता बार - बार कर फिक्सिंग तू बटोर नोट अपार सब कुछ मिले है तुरंत - फुरंत । ...छडो जी, सानु की... वडे लोकां दियां वडी गल्लां.... - मैं कब से बकवास करता आ रहा हूँ, पर अब सरकार को भी पता चला है कि आई पी एल वाकई एक गन्दा खेल है. क्रिकेटर, उनकी पत्नियाँ, उनकी माशुकें, उनके मित्र, उनके लोग... आज का क्रिकेट गीत ! - *इन पापी लोगो (IPL) ने,* *इन पापी लोगो (IPL) ने,* *इन पापी लोगो ने लगा दिया जी सट्टा मेरा......,* *हो जी हो सट्टा मेरा,* *हां जी हाँ सट्टा मेरा..." जनता ",!! अभी पता नहीं चला क्या ?? - *"सूझबूझ वान"सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !!* * कल यूपीए सरकार के नो साल पूरे हो गए , इस अवसर पर रात्रि-भोज रख्खा गया ,जनता हेतु नहीं बल्कि ..चमकदार असफलता की असफल पार्टी - विगत नौ वर्षों से अपनी (अन)उत्कृष्ट सेवाएँ देने वाली संस्था के द्वितीय पंचवर्षीय सत्र का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाना है. ...अच्छाई कभी मिट नहीं सकती - *धर्म-जाति-क्षेत्रियता के नाम पर भोले-भाले लोगों को बरगला कर कुछ मुट्ठी भर लोग अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हुए हैं,पर फिर भी इमान, इंसानियत, सच्चाई अभी ... मुझे तो बीती यादों से दिल बहलाना है .... !!! - *आजकल अपने वतन से दूर ....और अपनी छोटी बेटी के * *बहुत पास टोरंटो (केनाडा) में श्रीमती जी के साथ ,और अपनी * *दोनों नातिन के संग समय बहुत अच्छा कट रहा है .....एंजोलिना ...एक खबर कई कोण - एंजोलिना जोली अमेरिका की एक ख्यातनाम अभिनेत्री है उन्होंने एक परिक्षण में पाया की उनके शरीर में एक जीन बी आर सी १ है जिसकी वजह से उन्हें ब्रेस्ट केंसर ..हांफता,काँपता दमे से पीड़ित, मेरा प्रेम हुआ मृत्यु में लीन - हांफता,काँपता दमे से पीड़ित, मेरा प्रेम हुआ मृत्यु में लीन खुश हूँ बहुत मैं आज, संताप मेरा हुआ आज क्षीण. जब जीवित था,स्वप्न बिखरे थे सूने पथ पर मेरे....नाकाम इश्क - एक तूफ़ान की तरह आया था तेरा इश्क अपनी सारी हदें लांघता हुआ डुबो डाला था मेरा सारा वजूद. नामंजूर था मुझे खुद को खो देना नामंजूर था मुझे तेरा नमक! सो लौटा दिया.. मुख़्तसर सी बात है..... - उदासी की दूसरी किस्त * * * * आज सुबह आंखें खुली तो पाया.....पलकों की कोर में आंसुओं की नमी है। पता भी नहीं लगा और याद में तेरी रात भर रोती रही आंखें।...बचपनममता की छाँव में परवान चढ़ पल्लवित होता प्यारा सा भोला सा बचपन माँ के दुलार में खोया रहता कुंद के पुष्प सा महकता मीठी लोरी सुनता बचपन | प्यार भरी थपकिया पा चुपके सेआँखें मूंदता सोने का नाटक करता फिर धीरे से अँखियाँ खोल माँ को बुद्धू बनाता बचपन. ..... मेरा परिचय विशाल हिमखण्ड के नीचे मंथर गति से बहती सबकी नज़रों से ओझल एक गुमनाम सी जलधारा हूँ मैं ! अनंत आकाश में चहुँ ओर प्रकाशित अनगिनत तारक मंडलों में एक टिमटिमाता सा धुँधला सितारा हूँ मैं !..जहाँ भी देखो बैनर -पोस्टर !दूर -दूर तक नज़र न आए मंज़र क्यों बहारों के जहाँ भी देखो बैनर -पोस्टर केवल ठेकेदारों के ! रंग-बिरंगे चैनल भी अब हाल चाल क्या बतलाएं नारों में रंगी दीवार लगते चेहरे हैं अखबारों के ! अदालतों से बरी हो रहे दौलत के भूखे कातिल भी नीति,नीयत निर्णय सब कुछ हाथों में हत्यारों के ! अपना दर्द किसे बतलाएं ,सभी व्यस्त हैं अपनों में ..अलविदा साज़ जबलपुरी जी : संजीव वर्मा सलिल - ...जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है ... - जबलपुर में दमोह रोड स्थित माढोताल तालाब है . दमोह रोड में मेरे चाचा जी का मकान है और उनके मकान के ठीक पीछे माढोताल तालाब है . यहाँ मैं बचपन से जा रहा हू... मुगालते ... - लो, तमाम मूर्ख, बे-वजह का हो-हल्ला मचा रहे हैं मुल्क में 'उदय' जबकि - दोष अधिनस्थों का नहीं, उनके चाटूकार समर्थकों का है ? ... अब हम क्या कहें 'उदय',...ओ मेरे !...........1 - सपनों के संसार की अनुपम सुंदरी नहीं जो तुम्हें ठंडी हवा के झोंके सी लगती, फिर भी हूँ .......सोचती हूँ , शायद , कुछ ......rani Amrit kaur park , Tarna hills mandi ,रानी अमृत कौर पार्क , तारना हिल्स , मंडी रानी अमृत कौर पार्क जिसे तारना हिल्स, मंडी पर बनाने के बाद दलाई लामा ने जनता के लिये खोला था एक सुंदर और छोटा सा पार्क, जो कि तारना देवी मंदिर के बगल में होने के कारण और ऐसी पहाडी पर होने के कारण जो कि मंडी शहर का बढिया नजारा प्रस्तुत करती हैं ....हम दुबेजी बोल रहे हैं ! - "हैलो सर ! हम मेरु कैब से दुबेजी बोल रहे हैं" जिस सम्मान और गर्व के साथ दुबेजी ने अपना नाम लिया मन किया कहूँ - "दुबे जी प्रणाम !" नाटे कद के काली-सफ़ेद.दगाबाज तोरी बतियाँ कह दूंगी..हाय राम कह दूंगी ! - ताऊ डाट इन की यह शुरूआती पोस्ट्स (अक्टूबर-2008) में थी जो राष्ट्रीय समाचार पत्र हमारा मैट्रो में 20 मई 2013 को प्रकाशित हुई है. जिसकी सूचना ...पानी का निशान मिटता नहीं - सुनो..... पानी का निशान मिटता नहीं कभी कहा था तुमने पानी पर मेरा नाम लिखते हुए पानी में भीगे वे शब्द आज भी गीले हैं पानी गीला नहीं होता पर मेरी आँखों .... कार्टून :- उफ़्फ, यहां तो खुजाना भी ज़ुर्म हो गया !!! दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....
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