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राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा
स्वप्न सुनहरे:स्वप्न सुनहरे चमक उठे हैं नयनों की इस झील में जैसे झिलमिल करते तारे अंबर नील में आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Mar 04 2014, 04:35
समय
समय
घटनाओं के बीच सार्विक संपर्क ( universal contact ) भौतिक जगत की सर्वाधिक सामान्य नियमितता ( regularity ) है। इसका आधार यह है कि विश्व की सारी वस्तुओं, प्रक्रियाओं तथा घटनाओं में एक सर्वनिष्ठ गुण ( common property ) है, वह है उनकी भौतिक प्रकृति। यहां.. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Mar 01 2014, 13:52
राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा
आ गए मेहमां हमारे : उर्दू में कहावत है कि वह गृहस्थ धन्य है जिसके दस्तरख्वान पर कोई अतिथि भोजन ग्रहण करता है क्योंकि परमपिता परमात्मा उस गृहस्थ के ऊपर अनुग्रह कर उसे एक अतिथि की सेवा करने का अवसर प्रदान करते हैं.परन्तु आज के युग में अतिथि-सत्कार को .. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Mar 01 2014, 04:32
Yogesh Sharma
Yogesh Sharma
कई बार यूं भी होता है  http://www.aapkayogeshsharma.blogspot.in/2014/...html
0 Views · Comment · Feb 27 2014, 13:14
Yogendra Joshi
Yogendra Joshi
"वरिष्ठ नागरिक होना भी माने रखता है" - लघुकथा - रेलगाड़ी एवं बसों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने के स्थान बहुधा आरक्षित रहते हैं । वरिष्ठ का मतलब उस व्यक्ति से है जो वयसा साठ साल या अधिक का हो चुका हो । बसों/रेलगाड़ियों के संदर्भ में तो यह.. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 25 2014, 17:55
राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा
मन पलाशों के खिले हैं : नेह के रथ से मिले संकेत अमलतास के लौट आए टहनियों के लालनीले पंख वाले दिन आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 24 2014, 04:15
समय
समय
जो व्यक्ति द्वंद्वात्मक ( dialectic ) ढंग से सोचता है, वह इन अंतर्विरोधों से जूझता है, उन के आपसी संबंधों को समझने की कोशिश करता है, घटनाओं के कारण के रूप में इनकी एकता और संघर्षों के स्वरूप को समझने की कोशिश करता है। इसलिए वह प्रकृति, समाज तथा चिंत.. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 22 2014, 13:01
राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा
आराम बड़ी चीज है: किस किस को कोसिये किस –किस को रोईए आराम बड़ी चीज है मुंह ढँक के सोइए आज के सन्दर्भ में शायर की ये पंक्तियाँ बहुत मौजूं हैं.मनुष्य पंचतत्वों का पिंड मात्र नहीं है.उसकी पांच इन्द्रियां हैं,जिनसे उसे अनुभूति होती है,मस्तिष्क है,जिससे वह.. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 20 2014, 04:24
Yogesh Sharma
Yogesh Sharma
तन्हाई थोड़ी http://aapkayogeshsharma.blogspot.in/2014/02/b...html
0 Views · Comment · Feb 17 2014, 09:06
राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा
दर्द सहा नहीं जाता: दर्द तो होता है मगर सहा नहीं जाता तू सामने भी है मगर कहा नहीं जाता आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 17 2014, 04:19
समय
समय
निस्संदेह, बाह्य कारकों की भूमिका को पूरी तरह अस्वीकार करना ठीक नहीं होगा, जो किसी न किसी प्रकार से गति में सहायक या बाधक हो सकते हैं। किंतु सभी प्रकार की गति का उद्‍गम, स्रोत ( मूल ) आंतरिक विरोध ही होते हैं : नये विरोधों के आविर्भाव से गति का नया .. आगे पढ़ें..
0 Views · Comment · Feb 15 2014, 13:14
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