क्यों मैं तुमसे प्यार करूँ -सतीश सक्सेना -
गहरे घाव दिए, श्रद्धा ने , क्यों सत्ता स्वीकार करूँ !कौन सहारा दिया तुम्ही ने ,जो मैं तुमसे प्यार करूँ !माँ कहतीं थी, पिता डांटते, अन्तर्यामी तुम्हे बताएं, कहते सब कुछ,तब होता है,जब तेरा सम्म..
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क्यों मैं तुमसे प्यार करूँ -सतीश सक्सेना -
गहरे घाव दिए, श्रद्धा ने , क्यों सत्ता स्वीकार करूँ !कौन सहारा दिया तुम्ही ने ,जो मैं तुमसे प्यार करूँ !माँ कहतीं थी, पिता डांटते, अन्तर्यामी तुम्हे बताएं, कहते सब कुछ,तब होता है,जब तेरा सम्मान करूँ ? कहते तुम,दौड़े आते थे , अपमानित द्रोपदी, देखकरआज तो तुम बच्चे नुचवाते,क्यों मैं तेरा नमन करूँ ?आज मानवों के कार्यों पर, शर्म राक्षसों को आती है ,पतित मानवों का हिस्सा हूँ,फिर क्यों आराधना करूँ ?आज राक्षसी अपने बच्चे, छिपा के रखतीं मानव सेमानव कितना गिरा,विश्व में, क्या तेरी वन्दना करूँ !
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