Vote & Change my Mood

  

My Music


Contacts

more
manojiofs

Followers

view all

My QR code

0
tmp5ce0e49c6daa5eb858d5ef9f4190bd4b.jpg
Manoj Kumar
करण समस्तीपुरी http://manojiofs.blogspot.com/

स्मृति शिखर से– 8: वे लोग, भाग - 1

http://manojiofs.blogspot.com/2012/02/8-1.html
--- करण समस्तीपुरी बिहार प्रांत का सरैसा परगना। गंगा, गंडक और बागमती की धाराओं के बीच बसा है समस्तीपुर मंडल। पूरब दिशा में रास्ते का दसवां किलोमीटरी पत्थर पार करते ही मेरा गाँव शुरु हो जाता है। बीच से गुजरने वाली पूर्वोत्तर रेलपथ उसे दो भागों म.. Read More
0
tmp2bae7c9558e05627c9c9f665505d707a.
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://testmanojiofs.blogspot.com/

सूफ़ी दर्शन-2

http://www.testmanojiofs.com/2012/02/2_21.html
-सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया अंक-7 सूफ़ी दर्शन-2 वाजिबुल वुजूद अल्लाह अजन्मा और अनश्वर है। उसके अलावा जो कुछ है सब परिवर्तनशील और नश्वर है। वह रचयिता है और सभी जीव उसी की एक रचना है। उसने उसे रूप देकर इस सृष्टि में पैदा किया। जीव का शरीर.. Read More
0
tmpde0af195d0acbca58bc433b07fe7c8da.gif
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://testmanojiofs.blogspot.com/

दक्षिण अफ़्रीका के लिए प्रस्थान

http://www.testmanojiofs.com/2012/02/blog-post_18.html
-गांधी और गांधीवाद- 99 दक्षिण अफ़्रीका के लिए प्रस्थान थोड़े दिनों में ही गांधी जी ने काफ़ी अच्छी वकालत जमा ली। यह सब देखकर गोखले जी बहुत ख़ुश हुए। उस समय प्रतिभाशाली और निष्ठावान देशसेवकों की बड़ी कमी थी। गांधी जी जैसे सुयोग्य, उत्साही और लगनशील क.. Read More
0
tmp9358e9a8f616e5c55a1618f70ce8f1df.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://testmanojiofs.blogspot.com/

बड़ सुख सार पाओल......... गंगा की गोद में !

http://www.testmanojiofs.com/2012/02/blog-post_16.html
-बड़ सुख सार पाओल .... गंगा की गोद में ! बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे ! बात तब की है जब मैं कुंभ के अवसर पर हरिद्वार गंगास्नान करने गया था। हम भी कुंभ नहा आए! हरिद्वार के हर की पौड़ी में डुबकी लगाना जीवन का सबसे अहम अनुभव था। आप इसे मेरी धर्मांधत.. Read More
0
tmpebb7a6dc7c2be5d1c4fed3ccab080420.jpg
Manoj Kumar
संगीता स्वरुप ( गीत ) http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/

कुरुक्षेत्र ॥ चतुर्थ सर्ग ...( भाग - 7 )रामधारी सिंह दिनकर

http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2012/02/7.html
-किन्तु बुद्धि नित खड़ी ताक में                 रहती घात  लगाए कब जीवन का ज्वार शिथिल हो                   कब वह उसे दबाये ।   और सत्य ही , जभी रुधिर का                 वेग तनिक कम होता सुस्ताने को कहीं ठहर                 जाता जीवन का सोत.. Read More
0
tmp6ab76daa8328a43e48889071b4368c6c.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/

प्रेरक प्रसंग-24 : सेवामूर्ति बापू

http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2012/02/24.html
-प्रेरक प्रसंग-24 प्रेरक प्रसंग – 1 : मानव सेवा, प्रेरक-प्रसंग-2 : सहूलियत का इस्तेमाल, प्रेरक प्रसंग-3 : ग़रीबों को याद कीजिए, प्रेरक प्रसंग-4 : प्रभावकारी अहिंसक शस्त्र, प्रेरक प्रसंग-5 : प्रेम और हमदर्दी, प्रेरक प्रसंग-6 : कष्ट का कोई अनुभव न.. Read More
0
tmp0f5cca719ac2e6e05f65591e903cb9ed.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/

पुस्तक परिचय-20 : अक्षरों के साये

http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2012/02/20.html
-पुस्तक परिचय-20 पुराने पोस्ट के लिंक 1. व्योमकेश दरवेश, 2. मित्रो मरजानी, 3. धरती धन न अपना, 4. सोने का पिंजर अमेरिका और मैं, 5. अकथ कहानी प्रेम की, 6. संसद से सड़क तक, 7. मुक्तिबोध की कविताएं, 8. जूठन, 9. सूफ़ीमत और सूफ़ी-काव्य, 10. एक कहान.. Read More
0
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/

गुणाढ्य (माल्यवान) की कथा की अंतिम कड़ी

http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2012/02/blog-post_16.html
-हर वृहस्पतिवार की तरह आज  आप सभी पाठकों को सादर प्रणाम करते हुए अनामिका फिर हाज़िर है इस ब्रहस्पतिवार अपनी कथासरित्सागर का पिटारा लेकर... साथियों अब तक हम कथासरित्सागर के नौ अंक पूर्ण पढ़ चुके हैं जिनमे हमने शिव-पार्वती जी की कथा, वररुचि की कथा .. Read More
0
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://manojiofs.blogspot.com/

गांव की ललक

http://manojiofs.blogspot.com/2012/02/blog-post_20.html
-गांव की ललकश्यामनारायण मिश्रअम्मा  की  डाली आदत सीपुरखों से  मिली विरासत सी    छोड़  नहीं  पाता  हूं             गांव की ललक।धड़कन में हंसों का शोर,    आंखों में लहराता ताल।सपनों  में  तैरती  रही,    मछुआरी नौका की पाल।हंसी में नहीं    गगरी के.. Read More
0
tmp886ecd61494a820320c1003869ac1c31.jpg
Manoj Kumar
हरीश प्रकाश गुप्त http://manojiofs.blogspot.com/

http://manojiofs.blogspot.com/2012/02/100.html
-भारतीय  काव्यशास्त्र– 100आचार्य  परशुराम राय    आजकाव्यशास्त्र शृंखला का 100 वाँ अंक प्रस्तुत करते हुए बहुत हर्ष हो रहा है। इसशृंखला की शुरूआत करते समय एक बार विचार आया था कि यह पाठकों की रुचि के अनुरूप हो भीसकेगी अथवा नहीं। बीच-बीच में कुछ व्.. Read More
0
tmp8db460794959dbacfbda4a3973ae32c3.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://manojiofs.blogspot.com/

फ़ुरसत में … प्रेम-प्रदर्शन

http://manojiofs.blogspot.com/2012/02/blog-post_18.html
-फ़ुरसत में … 92 प्रेम-प्रदर्शन मनोज कुमार एक वो ज़माना था जब वसंत के आगमन पर कवि कहते थे, अपनेहि पेम तरुअर बाढ़ल कारण किछु नहि भेला । साखा पल्लव कुसुमे बेआपल सौरभ दह दिस गेला ॥ (विद्यापति) आज तो न जाने कौन-कौन-सा दिन मनाते हैं और प्रेम के प्रदर्.. Read More
0
tmp053a808f31c65879e70cf81953dd370e.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://manojiofs.blogspot.com/

स्मृति शिखर से ...7 : गाँधीगिरी

http://manojiofs.blogspot.com/2012/02/7.html
-स्मृति शिखर से ...7 गाँधीगिरी करण समस्तीपुरी एक साल हो गए थे बंगलोर में रहते हुए। कपड़ों का सलिका आ गया था, आफ़िस-मैनर्स भी सीखे, अंगरेजी भी कुछ हद तक सुधर गई थी लेकिन वह गँवई मेरे व्यक्तित्व से अलग नहीं हो पा रहा था या यूँ कहें कि मैं खुद भी .. Read More
0
tmpdabfd77ab30babba16a0eeab8406967e.jpg
Manoj Kumar
मनोज कुमार http://testmanojiofs.blogspot.com/

मुम्बई में वकालत

http://www.testmanojiofs.com/2012/02/blog-post_14.html
-गांधी और गांधीवाद- 98 मुम्बई में वकालत गांधी जी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं थे। बाधा और संकट की घड़ी में वे दुगने उत्साह से काम करने में जुट जाते थे। गिरगांव वाला मकान काफ़ी सीलन भरा था। पर्याप्त उजाला भी नहीं था, धूप बिलकुल नहीं आती थ.. Read More
0
tmpa18b713bb402b2042b54a2b7fcf4529d.
Manoj Kumar
संगीता स्वरुप ( गीत ) http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/

कुरुक्षेत्र ..चतुर्थ सर्ग … ( भाग- ६ ) रामधारी सिंह ‘दिनकर'

http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2012/02/blog-post_13.html
-शूरधर्म है अभय दहकते                         अंगारों पर चलना शूरधर्म है शाणित  असि पर                 धर कर चरण मचलना | शूरधर्म कहते हैं छाती तान                           तीर खाने को शूरधर्म कहते हँस कर                   हालाहल पी जाने .. Read More
Pages: 1 2 3 4
© Blogprahari · Contacts · Managed By Blogprahari Powered by Blogtronix · Hosted and Maintained by Blogprahari Network · Load Time0.75 Seconds