कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 -
नमस्कार मित्रों! आज की बुधवारीय चर्चा मे आपकी मित्र शशि पुरवार पुनः आपके समक्ष हाजिर है , आज की चर्चा एक विषय पर न हो कर अनेक रंग समेटे हुए है ,कहीं प्यार के रंग , ..
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कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 -
नमस्कार मित्रों! आज की बुधवारीय चर्चा मे आपकी मित्र शशि पुरवार पुनः आपके समक्ष हाजिर है , आज की चर्चा एक विषय पर न हो कर अनेक रंग समेटे हुए है ,कहीं प्यार के रंग , कहीं आक्रोश .....हर गलियों में पाए एक नया दर्शन .एक नया रंग ..काव्य संसार की घाटियों में --------- आप सभी का दिन मंगलमय हो . सुप्रभात....!कितनी भला कटुता लिखें(गजल)कल्पना रामानीअहम् ब्रह्मास्मि ... झरीं नीम की पत्तियाँ (दोहा-गीतों पर एक काव्य) (ठ) आधा संसार | (नारी उत्पीडन के कारण) (iv)पीड़ित बेटियाँ | Devdutta Prasoon मुझे अच्छी तरह मालूम है कि दहेज़ देने वाला बाप कभी भी नहीं कहता कि उस ने दहेज़ दिया | बेटी के लिये वर ढूँढना भगवान ढूँढने से भी कठिन है | बेटी के विवाह के नाम पर माँ बाप बिक जाते हैं | हाँ कभी कभी चमत्कार की तरह बहुत महान उदार बाप मिल जाता है जो दहेज़ नहीं मांगता | यह बात सब कोम मालूम है किन्तु ध्यान नहीं देते | मेरे भावुक मन में इस 'भीषण कुप्रथा' की गहरी छाप है | कविता: नीम Shobhana Sanstha पागलमैंएक पागल और आप अलग - अलग श्रेणी के पागल जनता ही गूंगी बहरी हो गयी है !"बेबाक महिला "बवाल है बवाल हैबता दे ऐ जानां..."न्यूज की परिभाषा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक'... क्या आप नहीं जाना चाहेंगे काठमाण्डू ? रवीन्द्र प्रभात at परिकल्पना - जो मेरा मन कहे - *कई दिन से 'सवाल' शब्द मेरे पीछे पड़ा था ,आज कुछ सोचते सोचते यह बेतुकी भी लिख ही दी

* सवाल इस बात का नहीं कि सवाल क्या है सवाल इस बात का है कि सवाल , सवाल ही क्यों है सवाल सच में "कवि मदन “विरक्त” के सम्मान में कवि गोष्ठी सम्पन्न" ( रपट-डॉ.रूपटन्द्र शास्त्री 'मयंक)' डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) at उच्चारण - जनता सबक सिखायेगी... धीरेन्द्र सिंह भदौरिया at काव्यान्जलि - 2 hours ago Corrupt files Repair Tool Aamir Dubai तू ही अंजानी ...!! Anupama Tripathi आर्यावर्तभोजपुर में महंत की हत्या कर अष्टधातु की मूर्तियां चुराई - बिहार में भोजपुर जिले के अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात अज्ञात अपराधियों ने एक मंदिर से अष्टधातु की तीन प्राचीन कीमती मूर्तियां चुरा ली और व... कार्टून:- 46 डिग्री में भी लोकतंत्र चालू हैज्ञान दर्पणकट्टरवाद : यत्र तत्र सर्वत्र - सदियों से संसार में शेफाली पाण्डेय आ रही सट्टालय से पुकार है बुकी गरजता बार - बार कर फिक्सिंग तू बटोर नोट अपार सब कुछ मिले है तुरंत - फुरंत ।श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ?गाँव हूँ मालूम है मुझे…induravisinghj हंसिए सा चांद रश्मि शर्मा निमिया के छाँव तले...ऋता शेखर मधु चैत के महीने में नीम की पत्तियाँ, फूल, फल, छाल आदि का प्रयोग खाने या लगाने के लिए किया जाता है| इससे काफी रोग दूर भाग जाते हैं| यह सबसे अधिक आक्सीजन देने वाला भी पेड़ है अतः हम न भूल पायेंगेशारदा अरोरा आज के दौर में एक मित्रता और सदभावना भरा दिल ही ढूँढना मुश्किल है ...और जब कभी ऐसा कोई मिल जाता है तो मन कुछ इस तरह गुनगुना उठता है ... *हम न भूल पायेंगे , ये जो तुम चले हो हमारे साथ * *दुनियावी बातों में , रूहानी सी हो जैसे कोई मुलाकात * ये कैसी अजीब कशमकश है उल्फत मेंदिल के कहे को दिमाग मानता नहीं ,मेरा अव्यक्त --राम किशोर बचा लो बेटियाँ अपनी/कविता प्रसन्न वदन चतुर्वेदी मित्रों ! दिल्ली की वारदातों और देश भर में ऐसी ही घटनाओं ने मुझे किसी नई रचना को जन्म देने से रोक रखा था क्योंकि मैं अपने हृदय की गहराइयों से स्वयं को बहुत ही दुखी महसूस कर रहा था। संयोग से मेरी बेटी को एक संस्था द्वारा आयोजित "बेटी बचाओ नशा छुड़ाओ" विषय पर कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये एक कविता की आवश्यकता पड़ी तो मेरे कलम खुद-ब-खुद लिखते गये और यह कविता बन गयी। बेटी ने भी प्रथम पुरस्कार पाकर इस कविता को सार्थक किया। हाइकू -ठंडी धूप बिटिया डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' गलियों का मज़ा -प्रेम की सकड़ी गली में दो समा सकते नहीं , कृष्ण राधा मिलन साक्षी ,कुञ्ज की गलियाँ रही रसिक भंवरा ही ये अंतर बता सकता है तुम्हे फूलों में ज्यादा...
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