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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"अब भी हमारे गाँव में...." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

http://uchcharan.blogspot.com/2012/02/blog-post_22.html
-इक पुराना पेड़ है अब भी है हमारे गाँव में।चाक-ए-दामन सी रहा अब भी हमारे गाँव में।।सभ्यता के ज़लज़लों से लड़ रहा है रात-दिन,रंज-ओ-ग़म को पी रहा अब भी हमारे गाँव में।मिल रही उसको तसल्ली देखकर परिवार को,इसलिए ही जी रहा अब भी हमारे गाँव मे.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कमल कुमार सिंह (नारद )

चर्चा मंच ७९६: रासायनिक साबुन

http://charchamanch.blogspot.com/2012/02/blog-post_22.html
-सबसे पहले सबको प्रणाम के साथ गउरा सिव बियाह की हार्दिक शुभकामनाएँ!        अति व्यस्तता ने चर्चामंच का संबोधन तक भूल चूका था, अबकी मैंने व्यस्तता को छुट्टी दे दी है,    दवेजी  के अटरिया  वाले एक गुंडा   दोस्त की  आत्मकथा  से पता चला की, रासायनि.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"आदरणीय “रविकर” जी को समर्पित-पाँच दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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-आदरणीय रविकर जी नेमेरे चित्र पर दो टिप्पणियाँ की थी!रविकर Feb 21, 2012 04:16 AMगेहूं जामे गजल सा,सरसों जैसे छंद |जामे में सोहे भला, सूट ये कालर बंद ||प्रत्‍युत्तर दें“उत्तर”रविकर Feb 21, 2012 04:19 AMसुटवा कालर बंद ||उसी के उत्तर में प.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"कुदरत ने सिंगार सजाया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

http://uchcharan.blogspot.com/2012/02/blog-post_21.html
-बौराई गेहूँ की काया,फिर से अपने खेत में।सरसों ने सिंगार सजाया,फिर से अपने खेत में।।हरे-भरे हैं खेत-बाग-वन,खिलकर हँसता सारा उपवन,झड़बेरी पर यौवन छाया,फिर से अपने खेत में।।नये पात पेड़ों पर आये,टेसू ने भी फूल खिलाये,भँवरा गुन-गुन करता आया,फिर से.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
Atul Shrivastava

http://charchamanch.blogspot.com/2012/02/796.html
- हर ओर भोलेनाथ का जयकारा है। वैसे तो सोमवार को शिवजी का दिन माना जाता है, पर इस सोमवार सोने पर सुहागे की तरह था। महाशिवरात्रि और वह भी सोमवार को........ भोले बाबा को प्रसन्‍न करने मंदिरों में भीड उमडी रही...... जगह जगह शिवजी का जलाभिषेक किया  .. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’

http://charchamanch.blogspot.com/2012/02/795.html
-ग़ाफ़िल की जानिब से आप सबको नमस्कार! दोस्तों पेशेख़िदमत है आज की चर्चा कालिंक नं.00करुण प्रार्थना त्रयतापहारी से  0दर्द आख़िर दर्द है _______________1-खुदा! खैर हो -दिलबाग विर्क _______________2-ऋतुराज वसन्त_______________3-माँगन मरण समान है .. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

http://charchamanch.blogspot.com/2012/02/794.html
-मित्रों!कल से सोच रहा था कि सबके ब्लॉग पर जाकर कमेंट करूँगा मगर नेट जवाब दे गया और कहीं भी नहीं जा पाया। कल रविवार है और चर्चा भी लगानी है इसलिए साइबर कैफे से कुछ अपनी पसंद के लिंकों की चर्चा लगा रहा हूँ! उस रोज जब तुमने, मुझे "बेटा" पुकारा था.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

http://charchamanch.blogspot.com/2012/02/793.html
-मित्रों!शनिवार के लिए चर्चा मंच में अपनी पसंद के कुछ लिंक प्रस्तुत कर रहा हूँ!ऐसी वाणी बोलिए.मन का आपा खोय! औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय।। अब आते हैं मुद्दे पर ............आप सबके जूते मेरे सिर पर ....!  कोई बात नहीं जी! लगती है आग जब पानी मे.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"शिवरात्रि मेला-फोटोफीचर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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-आज महाशिवरात्रि है! प्रातःकाल तो यहाँ दर्शनार्थी भक्तों कीबहुत लम्बी कतारें होती हैं।इसलिए हम लोग शाम को 5 बजेदर्शन और पूजा-अर्चना के लिए यहाँ पर आये।कहा जाता है कि इस मन्दिर में स्थापितयह मामूली सा दिखने वाला पत्थरशिवरात्रि की रात में सात बार.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"हर-हर, बम-बम गाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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-आई है शिव की शिवरात, हर-हर, बम-बम गाओ। लेकर बेलपत्र को साथ, चलो प्रसाद चढ़ाओ।।शंकर शमन करेंगे मन को,वो ही वर देंगे सज्जन को,जागो सारी रात, शिव का ध्यान लगाओ।लेकर बेलपत्र को साथ, चलो प्रसाद चढ़ाओ।।दुष्टों को जो सदा रुलाते,रुद्र तभी तो वो कहलाते.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"आयी है शिवरात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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-शिव-आशीषों की सौगात, लेकर आयी है शिवरात, बोलो हर-हर, बम-बम..! बोलो हर-हर, बम-बम..!! शंकर जी की आई याद, बम भोले के गूँजे नाद, बोलो हर-हर, बम-बम..! बोलो हर-हर, बम-बम..!! भूत-पिशा्च गणादि साथ, लेकर निकले शिव बारात, बोलो हर-हर, बम-बम..! .. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

एक किरण अब भी बाकी है........ (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक')

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-पिछले कई वर्षों से मैं दो-मंजिले पर रहता हूँ। मेरे कमरे में तीन रोशनदान हैं। उनमें जंगली कबूतर रहने लगे थे। वहीं पर वो अण्डे भी देते थे, परन्तु कानिश पर जगह कम होने के कारण अण्डे नीचे गिर कर फूट जाते थे। मुझे यह अच्छा नही लगता था। एक दिन कुछ फ.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"सबके मन को भाई रेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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- धक्का-मुक्की रेलम-पेल।आयी रेल-आयी रेल।। इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।। जब स्टेशन आ जाता है।सिग्नल पर यह रुक जाता है।।जब तक बत्ती लाल रहेगी।इसकी जीरो चाल रहेगी।।हरा रंग जब हो जाता है.. Read More
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

"सात रंगों से सजने लगी है धरा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

http://uchcharan.blogspot.com/2012/02/blog-post_15.html
-धानी धरती ने पहना नया घाघरा। रूप कञ्चन कहीं है, कहीं है हरा।। पल्लवित हो रहा, पेड़-पौधों का तन, हँस रहा है चमन, गा रहा है सुमन, नूर ही नूर है, जंगलों में भरा। रूप कञ्चन कहीं है, कहीं है हरा।। देख मधुमास की यह बसन्ती छटा,  शुक सुनाने लगे, अपना .. Read More
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